Wednesday, May 13, 2020

भाषा , भाषण , भीड़ ,भक्त और Vocal

जहाँ रह रही हूँ वहाँ  की भाषा मलयालम  है। हिंदी समझने और बोलने वाले नाम मात्र हैं लेकिन काम चल जाता है। वैसी कोई समस्या नहीं हुई अभी तक। जहाँ पढ़ाती हूँ वहाँ बस पढ़ाती भर हूँ। वहाँ दोस्त नहीं बने क्यूँकि ये लोग मलयालम में बात करते हैं और मुझे हर बार ये कहने में कि  " Guys, what are you talking about " अच्छा नहीं लगता। सो बस काम से काम रखा ।

लेकिन ऐसे लोगों से  मुझे हमेशा से समस्या थी और अभी भी है , जो , हिंदी अच्छी तरह से जानते हुए भी अंग्रेजी  में ही बात करते हैं । यहाँ जो अंग्रेजी बहुत अच्छे से जानते हैं ,वो भी आपस में मलयालम में ही बात करते हैं, जब तक मेरे जैसे एकाध हिंदी भाषी नहीं आ टपकते और मूसलचंद नहीं बनते , इन्हे कोई फर्क नहीं पड़ता।  तो अंग्रेजी आना यहाँ कोई आधुनिकता( कई परिभाषाएं है इसकी )  का मापदंड नहीं  है।  यही हाल हैदराबाद में भी था। मेरी मैनेजर जब तक आ कर हँसते हुए अपनी सरल अंग्रेजी में अपने लैपटॉप पर ही नजरें गड़ाए हुए, यह नहीं बोलती थी कि  " please speak in english , it is english speaking zone"  तक तक सब तेलुगु में ही बात करते थे।  मुझे देख कर कभी -कभी कोई टूटी -फूटी हिंदी में यह जरूर  पूछ लेता था    " केसे  हें आप"
मतलब मजाक में। बस इतना ही।

पुणे में भी यही हाल था।  Molecular लेवल पर सब मराठी में ही था। तो ऐसे समय पर मुझे अंग्रेजी ने ही survive करने में मदद की। समस्या अंग्रेजी से नहीं है मुझे,वह तो सम्पूर्ण विश्व को जोड़ने वाली भाषा है।  मेरे कई दोस्त जो हिंदी नहीं जानते ,उनसे अंग्रेजी या फ्रेंच में ही बात होती है।  भाषा समस्या कैसे हो सकती है?
भाषा तो समाधान है समस्याओं का।
समस्या इस बात से है कि लोगों को ये  लगता है कि, हिंदी बोलने वाला इंसान किसी न किसी तरह से पिछड़ा हुआ जरूर होगा। मतलब हिंदी जो आपने बोल दी तो  मतलब judge करने वाली जो भीड़ है उसे  तो जैसे खज़ाना मिल गया। मतलब हिंदी बोलने भर में jugde होने की असीमित सम्भावनाएँ हैं।

How middle class ! सबसे पहला judgement है।
हिंदी बोलना और पैसा होना  inversely proportional है अगर इस भीड़ की मानें तो।
अगर पैसा हुआ भी तो class नहीं होगा ,यह अगला चरण होता है।
 क्लास से मेरा यहाँ तात्पर्य है NIKE के जूते , Actually ऐसे जूते  जिनमें NIKE  बड़े बड़े अक्षरों में दिख जाये। मतलब लोगों को पता चल जाये कि औकात है आपकी खरीदने की। क्लास के और चिन्ह निम्नलिखित हैं -
1.Branded Bags
2.Branded Jeans मतलब Levi's दिखना चाहिए
3.Branded Undergarments मतलब JOCKEY दिखाने की  ख़्वाहिश तो कभी न कभी सबकी  रही होगी।लेकिन  क्लास के ग्रुप में शामिल  होने की आकाँक्षा रखने  वाले  कृपया ध्यान दें  कि अब JOCKEY middleclass की पहचान है।
4.Cursive writing में  एक tattoo  तो जरुरी है।
5.लड़कियों में आजकल straight बाल होना एक महत्वपूर्ण symptom है , artificially straight ( पार्लर वाला )
6.Red Matte Lipstick ( Brand का पता  नहीं चलता )
7.कितना भी भद्दा लगे लेकिन Bumchums( मुझे लड़कों के निकर के ब्रांड नहीं मालूम सो यही लिख दिया) पहन कर सब्ज़ी खरीदने जाना। ( ये Unisex characteristic hai ) मतलब comfort के नाम पर कुछ भी।
etc. etc.


अब अगर हिंदी बोलने के बाद भी  क्लास और पैसा दोनों हुआ तो यहाँ से बात राजनैतिक, सामजिक  और धार्मिक रंग ले लेती है। और तब जन्म होता है '' एक भक्त का " एक भक्त जो सेक्युलर है, मतलब सेक्युलर नहीं , कट्टर है।भक्त जो हिंदी बोलता है और कट्टर हिन्दू है , भक्त जो कट्टर हिन्दू है , मोदी का भक्त है और हिंदी बोलता है।  हिन्दू जो हिंदी बोलता है और कट्टर है और मोदी समर्थक है।
हिंदी बोलने भर से ये सारी बातें बस मान ली जाएँगी, तब, जब तय करने वालों ने ये जान लिया है कि आपके पास क्लास और पैसा दोनों  पहले से ही है।
इन दोनों के आभाव में आपकी पहचान  बिहारी, UP वाले , Rajasthan वाले इतने तक ही सीमित रहेगी। matlab North Indian  जो पंजाबी और कश्मीरी नहीं हो सकता।
झारखंड का नाम यहाँ नहीं लिख रही क्यूँकि personal experience है मेरा जिसके आधार पर कहने का साहस कर रही हूँ कि  देश की आधी से ज्यादा युवा आबादी को पता भी नहीं  झारखण्ड एक राज्य है। भला हो धोनी का जिनके वजह से लोग कम से कम  अब जानते हैं कि यह एक रहने की जगह  का नाम है।

तो हिंदी बोलना पैसे और क्लास होने के बाद , आपको हिन्दू बनाता है , हिन्दू होना आपको कट्टर बनाता है, जो कि  पर्यायवाची है भक्त का और गलती ये हो गयी इन भक्तों के भगवान् मोदी जी से कि ये हिंदी हीं बोलते हैं।  सोचती हूँ कि क्या ये कल वाला भाषण मोदी जी ने अगर शशि थरूर वाली अंग्रेजी में शानदार  अमेरिकन accent में दिया होता तो क्या आज उनके भाषण और भाषा पर ऐसे ही MEME बन रहे होते।  जो जीवन दर्शन उन्होंने अपने छोटे से भाषण में बता दिया , वही बात अगर उन्होंने अंग्रेज़ी में कही होती तो उनकी इसी  philosophy के सब मुरीद हो गए  होते। बस दुःख इस बात का है  कि कुछ लोग हैं  जो बड़ी ही बेशर्मी से dictionary खोजने में लगे हैं। 

क्रमशः -
अगला भाग -कल

अति आवश्यक सूचना - (यहाँ उन हिन्दुओं की बात नहीं हो रही जो खुद को सेक्युलर भर साबित करने के लिए मोदी का विरोध करते हैं)